जेन-जी और जेन-अल्फा को समझने के लिए बदलनी होगी पैरेंटिंग की सोच: माइलस्टोन अकादमी में पैनल डिस्कशन
भिलाई। माइलस्टोन एकेडमी में जेन-जी और जेन-अल्फा के दौर में पेरेंटिंग और टीचिंग विषय पर सामूहिक चर्चा (पैनल डिस्कशन) का आयोजन विगत दिनों किया गया। जिसमें शिक्षा और पैरेंटिंग से जु़ड़े विषय विशेषज्ञों ने नई-पुरानी पीढ़ियों को जोड़ने, उनकी आपसी समझ को बढ़ाने और नई पीढ़ी के भविष्य को आकार देने से जुड़े मुद्दों पर अपने-अपने विचार रखे।
स्कूल की प्राचार्य डॉक्टर श्रीमती ममता शुक्ला ने स्वागत उद्बोधन में विषय प्रवर्तन किया तथा वर्तमान समय में नई और पुरानी पीढ़ी के बीच की चुनौतियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नई और पुरानी पीढ़ी के बीच दूरियां कम रहे तो बेहतर है। हमें बहुत सख्त पैरेंटिंग से बचना होगा और अपने बच्चों को समय देना होगा।
इस दौरान प्रख्यात पैरेंटिंग विशेषज्ञ चिंरजीव जैन ने नई और पुरानी पीढ़ी के बीच के अंतर पर बात करते हुए कहा कि आज हम जेन जी की बात करें या जेन अल्फा, हमारी नई पीढ़ी अपने दौर की सर्वश्रेष्ठ है। यह संभव है कि उनसे बड़े होने की वजह से माता-पिता या पालक के तौर पर हम अपने बच्चों को समझ नहीं पाते हैं। श्री जैन ने कहा कि उन्होंने कहा कि यह लगभग वैसी ही स्थिति है, जैसे पहले कोई एम्बेसेडर कार इस्तेमाल करता हो और उसे अब नई मर्सीडीज दे दी जाए और इस मर्सीडीज को भी वह एम्बेसेडर की तरह ही इस्तेमाल करना चाहे। इससे दोनों पीढ़ियों के बीच का फासला और बढ़ता जाता है।
जैन ने मौजूदा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बाजार में हर प्रोडक्ट के साथ ‘यूजर्स मैन्युअल’ होता है लेकिन इस समाज में जब इंसान जन्म लेता है तो उसके साथ कोई मैन्युअल नहीं होता है। एक दौर में हमारे परिवार में दादा-दादी, नाना-नानी सहित तमाम बड़े एक ‘यूजर्स मैन्युअल’ की तरह पेश आते थे, जिससे नई पीढ़ी को मार्गदर्शन मिलता था। अब हालात बदल गए हैं और एकल परिवारों की बहुलता के चलते हमारे ये स्वाभाविक ‘यूजर्स मैन्युअल’ गुम होते जा रहे हैं। जैन ने कहा कि इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए हमें नए सिरे से इस पर विचार करना चाहिए। बेहतर हो कि हम स्कूल में पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग करते हैं, ठीक वैसे ही हर तीन महीने में अपने बच्चों को लेकर स्कूल में बैठें और टीचर्स के साथ चर्चा कर उसकी परवरिश को और बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने की बात करें। इस परिचर्चा में आभा शशि कुमार, सोनाली चक्रवर्ती, मृदु लखोटिया,अंजू त्रिपाठी, निमिषा सिंह और कुहू शुक्ला ने भी अपने विचार रखे।