गंजपारा बाबा रामदेव मंदिर में देवी भागवत का छठवां दिवस, मां दुर्गा की महिमा का हुआ वर्णन

गंजपारा बाबा रामदेव मंदिर में देवी भागवत का छठवां दिवस, मां दुर्गा की महिमा का हुआ वर्णन


दुर्ग/द्वारकाधीश के अवतार बाबा रामदेव जी के जन्मोत्सव के अवसर पर दुर्ग के गंजपारा में स्थित बाबा बाबा रामदेव जी की एक मात्र मंदिर में दिनांक 13 से 19 सितम्बर तक प्रतिदि रात्रि 8 बजे से देवी भागवत कथा का आयोजन किया गया है समिति के अध्यक्ष पंकज राठी ने बताया कि देश के प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित श्री राजीव कृष्ण महाराज धुलिया महाराष्ट्र द्वारा माता जी की देवी देवी महत्वय कथा की जा रही हैl
   श्री दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) के छठे दिन की कथा में राजीव कृष्णा जी ने भगवती दुर्गा के दिव्य स्वरूप और महिमा से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण ज्ञान की बातें बताई हैं। इस दिन मुख्य रूप से देवी कात्यायनी की पूजा और महिमा का वर्णन किया जाता है। छठे दिन की कथा में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर की सेना और उसके सेनापतियों (जैसे चिक्षुर और चामर) के विनाश की शुरुआत होती है। पंडित जी ने बताया कि यह कथा हमारे भीतर छिपे अहंकार, क्रोध और वासना रूपी राक्षसों को नष्ट करने की प्रेरणा देती है।सच्ची भक्ति की शक्ति: मां कात्यायनी की पूजा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। सच्चे मन से की गई भक्ति मनुष्य के सभी भयों को दूर कर देती है।इंद्रियों पर नियंत्रण: पंडित जी ने समझाया कि देवी महात्म्य का छठा अध्याय हमें सिखाता है कि जब तक हम अपनी इंद्रियों (राक्षसी प्रवृत्तियों) पर विजय प्राप्त नहीं करते, तब तक आत्मज्ञान या ईश्वर की कृपा मिलना असंभव है।सकारात्मक ऊर्जा का संचार: मां दुर्गा की कथा सुनने और उनके मंत्रों का जाप करने से घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है, जिससे मानसिक शांति और क्लेशों से मुक्ति मिलती है।
   राजीव कृष्ण जो ने बताया कि जगत जननी माँ दुर्गा या आदिशक्ति केवल एक रूप में सीमित नहीं हैं, बल्कि वे चर और अचर संपूर्ण सृष्टि की संचालिका हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी अपनी शक्तियों के लिए उन्हीं की आराधना करते हैं। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा, निष्कपट भाव और शरणागत होकर माँ जगदंबा का स्मरण करते हैं, माता उनके सभी भौतिक और आध्यात्मिक संतापों को दूर कर देती हैं।कर्म और पवित्रता: जीवन में सदाचार, सत्य और निष्काम भाव को अपनाना ही सबसे बड़ा धर्म है। देवी की उपासना से मन के विकार और पाप ऐसे नष्ट होते हैं जैसे सूखी लकड़ी अग्नि के संपर्क में आकर भस्म हो जाती है।ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति: सच्चा ज्ञान वही है जो मनुष्य को अहंकार से मुक्त करे और उसे यह समझाए कि यह संपूर्ण संसार उसी एक दिव्य शक्ति का विस्तार है। देवी भागवत के श्रवण और मनन से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति सुलभ होती है।
    आज की कथा में महिलाओं की संख्या अत्यधिक देखने को मिली, कथा में मुख्य यजमान पंकज पुरुषोत्तम गांधी एवं प्रीति साबू अध्यक्ष माहेश्वरी समाज महिला मंडल ममता टावरी इंदु भूतड़ा मनीषा राठी कंचन टावरी लीला टावरी मंजू राठी रश्मि चांडक आभा राठी पूनम राठी ज्योति रूंगटा प्रेमा रूंगटा ऊषा राठी सोनल राठी पूनम कश्यप मीनल गिल्डा कंचन भूतड़ा एवं सैकड़ों धर्मप्रेमी उपस्थित थेl