भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ’ आंदोलन राजनीतिक दिखावा, लोकतंत्र को कमजोर करने वाली पार्टी अब बचाने का कर रही ढोंग : राहुल शर्मा

भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ’ आंदोलन राजनीतिक दिखावा, लोकतंत्र को कमजोर करने वाली पार्टी अब बचाने का कर रही ढोंग : राहुल शर्मा

SIR के जरिए वोटों में कथित हेरफेर, इलेक्टोरल बॉन्ड, जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और प्रेस की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल; महंगाई, बेरोजगारी व कानून व्यवस्था को लेकर साय सरकार पर भी साधा निशाना

दुर्ग/ जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री राहुल शर्मा ने भाजपा द्वारा 30 अक्टूबर को दुर्ग में आयोजित किए जा रहे ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ आंदोलन को राजनीतिक दिखावा और हास्यास्पद करार देते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों से केंद्र और लगभग एक वर्ष से छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है। ऐसे में भाजपा का लोकतंत्र बचाने के नाम पर पदयात्रा और आंदोलन करना समझ से परे है। जो पार्टी स्वयं लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों से घिरी है, वह आज लोकतंत्र की रक्षा का नारा दे रही है। यह आंदोलन जनता को गुमराह करने की कोशिश है।

राहुल शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा किस लोकतंत्र को बचाने की बात कर रही है? उन्होंने SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर कर्नाटक के आलंद में 6,018 मतदाताओं के नाम कथित तौर पर फर्जी तरीके से हटाए जाने के मामले, बिहार में SIR के दौरान 65 लाख मतदाताओं के नाम हटने की आशंका तथा छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा चुनाव के बाद 12 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों में गड़बड़ी की शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची की शुचिता के नाम पर यदि मताधिकार प्रभावित होता है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित की गई चुनावी बॉन्ड व्यवस्था के माध्यम से भाजपा को 8,252 करोड़ रुपये का चंदा मिलने का दावा सामने आया है, जो कुल बॉन्ड राशि का लगभग 48 प्रतिशत बताया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2014 के 140वें स्थान से गिरकर 2024 में 161वें स्थान पर पहुंचना चिंताजनक है। वहीं, लोकतंत्र सूचकांक में भारत को ‘त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र’ की श्रेणी में रखा जाना भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

महंगाई, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था पर भी घेरा

छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल शर्मा ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को एक हजार रुपये देने की बात की जाती है, लेकिन दूसरी ओर रसोई गैस की कीमत लगभग 1,200 रुपये और डीजल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर पार होने से आम जनता महंगाई की मार झेल रही है। उन्होंने बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत होने का दावा करते हुए युवाओं को एक लाख नौकरियां देने के वादे पर भी सवाल उठाए। दुर्ग जिले में पिछले 10 महीनों के दौरान अपराधों में 35 प्रतिशत वृद्धि का आरोप लगाते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा।

राहुल शर्मा ने धार्मिक स्थलों को राजनीतिक कार्यक्रमों का मंच बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रांगण और राधा-कृष्ण मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों को राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ना उचित नहीं है। भगवान और धर्म के नाम पर राजनीति करना भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली को दर्शाता है।

भाजपा से पूछे जनता के सवाल

कांग्रेस महामंत्री ने भाजपा को उसके पुराने वादों की याद दिलाते हुए पूछा कि दो करोड़ रोजगार का वादा कहां गया, काला धन वापस लाने का दावा कहां रह गया और महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों के बीच लोकतंत्र की रक्षा की बात करने वाले नेता उस समय कहां थे? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने का वास्तविक अर्थ मतदाताओं के अधिकार, संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता की आवाज की रक्षा करना है, न कि सत्ता और कुर्सी बचाना।अंत में राहुल शर्मा ने कहा कि भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान का असली मकसद लोकतंत्र की रक्षा नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक जमीन और सत्ता बचाना है। 30 अक्टूबर को दुर्ग की जनता भाजपा से इन सवालों का जवाब मांगेगी। कांग्रेस का ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की आवाज है और जनता इस सच्चाई को समझ रही है।