पुलिस विभाग की तरह 'आधार बेस्ड' उपस्थिति से छूट मांगी स्वास्थ्य कर्मियों ने, महासमिति की बैठक में कई मुद्दों पर हुई चर्चा, जीवनदीप  कर्मियों को नियमित करने सहित कई मांगे उठाईं

पुलिस विभाग की तरह 'आधार बेस्ड' उपस्थिति से छूट मांगी स्वास्थ्य कर्मियों ने, महासमिति की बैठक में कई मुद्दों पर हुई चर्चा, जीवनदीप  कर्मियों को नियमित करने सहित कई मांगे उठाईं

भिलाई/छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की महासमिति की बैठक प्रधान कार्यालय रायपुर में आयोजित की गई। जिसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर विचार विमर्श करते हुए शासन-प्रशासन तक इन मांगों को पूरा करवाने भेजने एंव संगठन को मजबूत करने निर्णय लिया गया।  
संघ के प्रदेश महामंत्री सैय्यद असलम ने बताया कि यह  बैठक प्रांताध्यक्ष अनिल पांडेय और संगठन के संरक्षक सलाहकार व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंपेक्स ओ पी शर्मा की मौजूदगी में हुई। जिसमें सभी जिलों में पुलिस विभाग के भांति स्वास्थ्य कर्मचारियों को आधार बेस्ड उपस्थिति से मुक्त रखने की मांग रखी गई। 
सैय्यद असलम ने कहा कि पुलिस विभाग की भांति स्वास्थ्य कर्मचारी भी 24*7 आपातकालीन सेवाओं के अंतर्गत आते हैं जिससे कर्मचारियों को निर्धारित समय के बाद भी कार्य करना पड़ता है। शासन की ओर से जारी आधार बेस्ड उपस्थिति एप में कार्यालयीन दिवस 5 दिवसीय रखा गया है। 
सभी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन पालियों में स्वास्थ्य कर्मचारी सेवाएं देते हैं ऐसे में शनिवार और रविवार की उपस्थिति में तथा 10 से 5.30 की समयावधि पर व्यावहारिक समस्या सामने आ रही है। 
समस्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम को संचालित करने वाले स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले में शामिल ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक व संयोजिका, पर्यवेक्षक,एल एच व्ही,बी ई टी ओ,नेत्र सहायक अधिकारी,सीएचओ,नॉन मेडिकल असिस्टेंट, महिला पर्यवेक्षक का कार्य लक्ष्य आधारित होता है। जिसमें समय से अधिक कार्य करते हुए लक्ष्य को प्राप्त करना होता है, जिसका कोई अतिरिक्त भुगतान या बोनस शासन नहीं देता है। 
संघ के प्रांताध्यक्ष अनिल पांडेय, संरक्षक ओ पी शर्मा, महामंत्री सैय्यद असलम व सूरज प्रसाद देवांगन ने कहा कि आधार बेस्ड उपस्थिति में प्रमुख रूप से अधिकारी कर्मचारियों का आधार लिंक करना पड़ता है। कई कर्मचारी अपने आधार को साइबर क्राइम से बचाने डिजिटल लॉकर में रखते हैं। उपस्थिति लगाने बार बार यह डिजिटल लॉकर खोलने और हमेशा के लिए लॉकर खुला रखने से साइबर ठगी की आशंका बनी रहती है।
 तकनीकी कारणों से आधार बेस्ड उपस्थित में कठिनाई हो रही है। इनमें नेटवर्क नहीं मिलना प्रमुख है। इसके अलावा मैदानी अमले की स्वास्थ्य शिविरों में अन्यत्र स्थान पर ड्यूटी, सॉफ्टवेयर का सपोर्ट नही करना,कर्मचारियों के पास स्मार्टफोन नहीं होना, इंटरनेट स्पीड कम होना, पहुंच विहीन क्षेत्रों में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होना ओर कई कर्मचारियों का तकनीकी ज्ञान नहीं होना जैसी समस्याएं आ रही है।
 फील्ड के कर्मचारियों को स्वास्थ्य कार्यक्रम के लक्ष्यों को हासिल करने मुख्यालय से बाहर 8 से 30 किलोमीटर के दायरे में जाना पड़ता है। जिसके कारण आधार बेस्ड उपस्थिति केवल पदस्थापना स्थल के 100 मीटर दायरे से लगती है।  बैठक में संघ ने  निर्णय लिया है कि शासन को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा कर स्वास्थ्य कर्मचारियों को पुलिस विभाग के भांति आधार बेस्ड उपस्थित से मुक्त रखने अपील की जाएगी। 
महासमिति की बैठक में स्वास्थ्य कर्मचारी की वेतन विसंगति करने,सभी कैडरों की पदोन्नति समय अवधि देने, जीवन दीप समिति कर्मचारियों को नियमित करने, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी को नियमित करने और एन एच एम कर्मचारियों को नियमित व स्थानांतरण नीति बनाने व विभिन्न कैडरों के स्वास्थ्य कर्मचारियों को समयमान वेतनमान और एरियर का भुगतान करने, प्रदेश के अधिकारी कर्मचारियों को कैशलैस चिकित्सा उपलब्ध कराने, छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी का वार्षिक अधिवेशन कराने व छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ को मजबूत बनाने सदस्यता अभियान चलाने व आजीवन सदस्य बनाने सभी जिला अध्यक्षों व संभागीय अध्यक्ष व प्रांतीय पदाधिकारी ने विचार व मांग पर निर्णय लिया गया।  बैठक मे सभी जिलो के अध्यक्ष, सचिव, संभागीय अध्यक्ष व सचिव पदाधिकारी व प्रांतीय पदाधिकारी विभिन्न प्रकोष्ठ के संयोजक व पदाधिकारी उपस्थित थे।