दुर्ग के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर पूर्व पार्षदों का हमला, जर्जर भवनों पर उठाए सवाल

दुर्ग के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर पूर्व पार्षदों का हमला, जर्जर भवनों पर उठाए सवाल

दुर्ग/नया शिक्षण सत्र शुरू होने के साथ ही सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आ गई है। नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व पार्षदों ने आरोप लगाया है कि दुर्ग जिले के कई सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद मासूम छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हीं भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अब्दुल गनी सहित देवकुमार जंघेल, लिखन साहू, अमृत लोढ़ा, संजय सिंह, भोला महोबिया, मनोज चंद्राकर, मनीष यादव, डॉ. छत्रसाल गायकवाड, राजकुमार वर्मा और युवराज ठाकुर ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री के गृह जिले दुर्ग में ही सरकारी स्कूलों की यह स्थिति चिंताजनक है। ऐसे में प्रदेश के अन्य जिलों के सरकारी स्कूलों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
पूर्व पार्षदों ने बताया कि हाल ही में भिलाई के वृंदा नगर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला के एक कक्षा की छत भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि घटना के समय कोई छात्र हताहत नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन सरकार अब तक जर्जर शाला भवनों की सुध नहीं ले रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दुर्ग जिले में लगभग डेढ़ सौ शाला भवनों को कंडम घोषित किया जा चुका है, लेकिन उनके स्थान पर नए भवनों का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। जिन स्कूलों के भवन अनुपयोगी हो चुके हैं, वहां के विद्यार्थियों को आसपास के स्कूलों में समायोजित किया गया है, जिससे एक कक्षा में 40 की जगह 70 से 80 छात्र पढ़ने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इस तरह की भीड़भाड़ वाली कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती और इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा।
पूर्व पार्षदों ने राज्य सरकार से मांग की है कि जिले के सभी जर्जर शाला भवनों का तत्काल संधारण कराया जाए। साथ ही, नए स्कूल भवनों के निर्माण तक विद्यार्थियों के लिए अलग से सुरक्षित एवं वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।