पेंशनर्स के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों को महत्व दें - आचार्य शर्मा,दुर्ग भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने मनाया गरिमामय पेंशनर्स दिवस
दुर्ग। "पेंशन दिवस को कभी नहीं भुलाया जा सकता। इस के लिये स्व. डी.एस.नकारा का संघर्ष और योगदान अतुलनीय है। पेंशन के मौलिक अधिकार के लिये उन्हीं के द्वारा दायर याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 17 दिसंबर 1982 को निर्णय लिया गया था। उक्त फैसले में स्पष्ट उल्लेख है कि पेंशन न कोई कृपा है, न अहसान और ना ही दान, अपितु अतीत में की गई सेवाओं का भुगतान है। समाज और शासन इस लिये पेंशनर्स के स्वाभिमान और अधिकारों का सम्मान भी करते हैं।" ये विचार हैं प्रोफेसर और प्राचार्य के रूप में सुदीर्घ और सफल सेवा के बाद रिटायर हुए डॉ.महेश चन्द्र शर्मा के।वे दुर्ग भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ द्वारा आयोजित पेंशनर्स दिवस पर मुख्य अतिथि की आसन्दी से बोल रहे थे। संघ की उच्च शिक्षा शाखा के संभागीय संयोजक प्रो.महेश चन्द्र शर्मा ने भारत माता, छत्तीसगढ़ महतारी और स्व. डी.एस.नकारा के तैल चित्र की विधिवत पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
संघ कार्यालय केशरी नन्दन हनुमान मंदिर मीनाक्षी नगर दुर्ग में बड़ी संख्या में उपस्थित पेंशनर्स को सम्बोधित करते हुवे आचार्य डॉ.शर्मा ने कहा कि यह दिन शासन और समाज को हमेशा याद दिलाता रहेगा कि पेंशनर्स के सम्मान और सुरक्षा का हमेशा ध्यान रखें। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य रहे पी.डी.वैष्णव ने की। उन्होंने भी स्व.श्री डी.एस.नकारा जी को याद किया और उनकी सराहना की। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की दुर्ग सम्भागीय शाखा के महामंत्री पी.आर.साहू ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
बौद्धिक कार्यक्रम के बाद वरिष्ठ नागरिकों ने मनोरंजक-ज्ञानवर्धक खेलों के मजे भी लिए । मुख्य अतिथि के कर कमलों से पुरस्कार वितरण हुआ। इनाम पाकर पेंशनर्स के चेहरे खिल उठे। मौके पर शीतल प्रसाद साहू ,उत्तम कुमार टिकरिहा, घनश्याम देवांगन, अशोक कुमार कनेरिया, रामाधार ताम्रकार, पुष्पा साव, के.पी.देशमुख, रवीन्द्र कुमार भटनागर, के.के.आडिल, आर.डी.देशमुख, ए.के.गुप्ता, डॉ.तिवारी,पी.एस.बघेल एवं विजय देशमुख समेत बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित थे।