"रात में कानून भी सो जाता है?” — स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान ने ट्रैफिक नियमों को किया भ्रमित

दुर्ग/छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा को लेकर वर्षों से चल रहे जागरूकता अभियानों पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से उनके वाइरल वीडियो जिसमे वह बिना हेलमेट लगाए बाइक चलाते नजर आ रहे है के संदर्भ में यह कह दिया कि “रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक ट्रैफिक नियमों में ढील रहती है और हेलमेट अनिवार्य नहीं है।”
मंत्री के इस बयान के बाद आम नागरिक, वाहन चालक और यहां तक कि ट्रैफिक पुलिस भी यह सोचने पर मजबूर है कि —
क्या अब कानून घड़ी देखकर लागू होगा?
क्या रात में दुर्घटनाएं भी नियम मानकर रुक जाती हैं?
क्या हेलमेट सिर्फ दिन में ही सिर बचाता है?
Motor Vehicles Act और राज्य के ट्रैफिक नियमों में ऐसी किसी “नाइट शिफ्ट छूट” का उल्लेख नहीं है, फिर भी जिम्मेदार पद पर बैठे मंत्री का यह कथन न केवल भ्रम पैदा करता है, बल्कि सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर विषय को हल्के में लेने जैसा प्रतीत होता है।
विडंबना यह है कि एक ओर सरकार छत्तीसगढ़ में हेलमेट नियम को लागू करने के लिए अलग-अलग उपाय (जैसे “नो हेलमेट, नो पेट्रोल”) भी शुरू किए गए हैं ताकि लोग हेलमेट पहनें और सड़क सुरक्षा बढ़े। वहीं दूसरी ओर उसी सरकार के मंत्री यह संदेश देते नजर आ रहे हैं कि रात में नियम वैकल्पिक हैं।
अब सवाल यह नहीं है कि हेलमेट पहनना जरूरी है या नहीं, सवाल यह है कि —
कानून किताब में लिखा माना जाए या बयान में कहा गया?
प्रदेश की जनता और मीडिया यह जानना चाहती है कि क्या यह बयान सरकार की आधिकारिक नीति है या फिर सिर्फ एक “बिना हेलमेट का विचार”?
यदि यह नीति नहीं है, तो क्या इस भ्रामक बयान पर स्पष्टीकरण या सुधार की जरूरत नहीं है?
क्योंकि सड़क पर उतरते समय
गलती भी जानलेवा होती है और भ्रम भी।