रोज़ा भी, जिम्मेदारी भी: नौकरीपेशा रोजेदार निभा रहे ड्यूटी और इबादत साथ-साथ
भिलाई/शहर के नौकरी पेशा लोग भी माहे रमजान में रोजा रख रहे हैं। इस दौरान अपने कामकाज के साथ-साथ इबादत भी खूब कर रहे हैं। खासकर सरकारी नौकरियों के साथ रोजेदार माहे रमजान की तमाम जिम्मेदारी भी पूरी कर रहे हैं।
ड्यूटी के साथ रोजा रखने में नहीं होती कोई परेशानी:असलम
शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम चरोदा भिलाई 3 के बीईईटीओ सैय्यद असलम कहते हैं रोज़ा अल्लाह की बेहतरीन इबादत है इसको हर बालिग मर्द और औरत को रखना चाहिए हदीस का मफहूम है कि सभी इबादतों का दरवाजा रोजा है। ड्युटी करते हुए रोज़ा रखते कार्य करने में कोई परेशानी नहीं होती है सहयोगी साथी भी कार्य में सहयोग करते हैं। सैय्यद असलम कहते हैं इस मुबारक महीने में अपने लिए, अपने घर वालों के लिए, खानदान वालों के लिए, पड़ोसी, दोस्त अहबाब ,रिश्तेदारों और अपने मुल्क के लिए दुआ करें। खूब इबादत करें।
नहीं होती कोई परेशानी:मिराज
भिलाई इस्पात संयंत्र कोक ओवन बैटरी-11 सीडीसीपी में चार्जमैन मिराज अकरम कहते हैं कि रमजान का मुबारक महीना इबादतों का महीना है। प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम ने हमें जो तालीम दी है उसमें चलने पर कामयाबी है। अपने कार्यस्थल की गर्मी के बावजूद रोज़ा रखते हुए इस महीने की बरकत और रहमतों को पाने की कोशिश है। जनरल शिफ्ट रहती इसके बावजूद सभी कार्य करने में और रोजा रखकर तरावीह पढ़ने में कठिनाइयां नहीं होती है। यह महीना सब्र का है। हदीस में आता है जिसका सार है कि रोजा का बदला अल्लाह स्वयं देते हैं या स्वयं अपने को देते हैं।
बरकतों का महीना है रमजान:ऐमन
भिलाई इस्पात संयंत्र ऊर्जा प्रबंधन विभाग में सीनियर मैनेजर ऐमन अली कहते हैं कि माहे रमज़ान बड़ा बरकतो वाला महीना है। रोजा रखने से भूख प्यास की शिद्दत पता चलती हैं। गरीबी के चलते जिन्हें खाना मयस्सर नहीं होता, उनके प्रति सहानुभूति और करुणा जागृति होती है। रोज़ा संयम और धैर्य को पैदा कर जीवनशैली गुजारने की बेहतरीन अल्लाह की इबादत है। गरीब बेसहारा मिस्कीन यतीमों बेवा पर ख़र्च करने को प्रेरित करता है। जहां तक कार्यस्थल की बात है तो रोजे की हालत में भी अपने दायित्वों को बखूबी अंजाम देते हैं।
हिदायत का महीना है रमजान:नासिर
सुपेला संडे बाजार के कपड़ा व्यापारी नासिर कुरैशी कहते हैं कि रमजान महीने सभी लोगों के लिए खैरो बरकत और हिदायत लेकर आता है। रोज़ा रखने वाले को चाहिए कि उसके आदाब जो बताए गए हैं उनका अमल करें। रोज़ा रखकर हर बुराई से बचने की कोशिश करें और नेक काम ओर अल्लाह को राज़ी करने वाले कामों को करें और हुजूर की सुन्नतों को अपनी जिंदगी में लाने की भरसक प्रयास कोशिश करें ताकि दुनिया में साफ सुथरा सादगी और अमन और खुशहाली पाकीजा माहौल बने।