महिला आरक्षण बिल में सामाजिक संतुलन की कमी, सभी वर्गों को नहीं मिलेगा लाभ – निकिता मिलिंद
दुर्ग/ दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की महामंत्री निकिता मिलिंद ने केंद्र की भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण बिल को लेकर कई गम्भीर सवाल उठाए है उन्होंने कहा है कि महिला आरक्षण बिल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोई स्पष्ट कोटा निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इस आरक्षण का लाभ मुख्यतः पहले से सशक्त और प्रभावशाली वर्गों की महिलाओं तक सीमित रह सकता है।
भारत की सामाजिक संरचना को देखते हुए यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। देश की बड़ी आबादी OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक वर्गों से आती है। यदि इन वर्गों की महिलाओं को अलग से प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तो यह बिल उनके वास्तविक सशक्तिकरण का माध्यम नहीं बन पाएगा।
आलोचकों का मानना है कि केवल “महिला” के आधार पर आरक्षण देना पर्याप्त नहीं है। सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को ध्यान में रखते हुए आरक्षण की संरचना तैयार करना जरूरी है। अन्यथा, यह कदम अनजाने में कुछ जातियों और वर्गों के वर्चस्व को बनाए रखने वाला साबित हो सकता है। राजनीतिक दलों को टिकट वितरण में सामाजिक संतुलन सुनिश्चित करना चाहिए। यदि पार्टियां स्वयं इस दिशा में पहल नहीं करतीं, तो केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा।
महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य तभी सार्थक माना जाएगा, जब यह सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर प्रदान करे। समावेशी दृष्टिकोण के बिना यह प्रयास अधूरा रह सकता है और समाज में समानता के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।