बच्चों की परवरिश और संस्कार देने में अहम भूमिका निभाता है बाल साहित्य:रमेश,साहित्यकार कमलेश चन्द्राकर की कृति ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ का हुआ विमोचन
भिलाई। अगासदिया एवं वैभव प्रकाशन के संयुक्त तत्वाधान में प्रख्यात बाल साहित्यकार कमलेश चन्द्राकर की कृति ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ का विमोचन, परिचर्चा एवं सम्मान कार्यक्रम भिलाई निवास कॉफी हाउस सभागार में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नई दिल्ली से आए जाने माने बाल साहित्यकार दिविक रमेश ने मौजूदा दौर में बाल साहित्य की दशा और दिशा पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बाल साहित्य सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह बच्चों की परवरिश और उन्हें संस्कार देने में अहम भूमिका निभाता है।
अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात कथाकार डॉ परदेशी राम वर्मा ने मौजूदा दौर में आंचलिक बाल साहित्यकारों के रचनाकर्म पर रोशनी डाली। संवाद के अंतर्गत साहित्यकार विनोद साव, गिरीश पंकज, गुलबीर सिंह भाटिया और रवि श्रीवास्तव ने मूल रूप से इस बात पर चिंता जताई कि आज बाल साहित्य पर ज्यादा चर्चा नहीं होती।
जरूरत इस बात कि है कि बाल साहित्य पर सम्मेलन हो और इस पर विमर्श हो। इसके पहले शुरूआत में लेखक कमलेश चंद्राकर की बेटी ऋतुपर्णा चंद्राकर ने अतिथियों का स्वागत किया। कलाकार राजेन्द्र साहू ने छत्तीसगढ़ महतारी वंदन प्रस्तुत किया।
रचनाकार कमलेश चंद्राकर ने अपनी कुछ चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया। साहित्यकार डॉ. सुधीर शर्मा ने पुस्तक "मम्मा मेरी सुनो ज़रा" की समीक्षा की। आयोजकों की ओर से रचनाकार कमलेश चंद्राकर का मान पत्र, शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। वहीं मुख्य अतिथि दिविक रमेश शाल श्रीफल से सम्मान रचनाकार कमलेश चंद्राकर के हांथो किया गया। समूचे कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने किया। वहीं आभार प्रदर्शन शिक्षा विद् डॉ डी. एन शर्मा ने किया।