सुपेला में 129वीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर माल्यार्पण, क्रांतिकारी विचारों को किया गया नमन
“आजादी दी नहीं जाती, लहू उबालकर ली जाती है” — नेताजी का यह प्रमुख नारा आज भी युवाओं के रक्त में उबाल ला देता है।
भिलाई/ सुपेला अंडर ब्रिज, प्रियदर्शनी परिसर में 129वीं क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर नेताजी के जीवन, संघर्ष और विचारों पर प्रकाश डाला गया।वक्ताओं ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के देशभक्ति से परिपूर्ण कार्यों और उनके विचारों का संदेश आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना अत्यंत आवश्यक है। आज़ादी को हम बलिदान, त्याग और पराक्रम दिवस के रूप में मनाते हैं।इस कार्यक्रम में समाजसेवी एवं श्रमिक नेता प्रशांत कुमार क्षीरसागर, किशोर कनोजे एवं मनोज ठाकरे ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस एक महान भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे, जिन्हें भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने 1943 में आज़ाद हिंद फौज का नेतृत्व किया था।
“आजादी दी नहीं जाती, ली जाती है”,
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” —
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ये क्रांतिकारी नारे आज भी युवाओं के लहू में जोश भर देते हैं।
23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है।