267 महिलाओं से ₹1.11 करोड़ की ठगी, बैंक से जुड़े दो आरोपी 24 घंटे में गिरफ्तार
दुर्ग। दुर्ग जिले के धमधा में महिलाओं को ऋण दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक से संबद्ध सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की धमधा शाखा में पदस्थ कर्मचारियों ने 267 महिला ग्राहकों से वसूली गई लोन की किस्त और लोन क्लोजर की राशि कंपनी में जमा करने के बजाय उसका गबन कर लिया। मामले में कुल 1 करोड़ 11 लाख 93 हजार 173 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस के मुताबिक, 4 जुलाई 2026 को सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि अशोक कुमार वर्मा ने थाना धमधा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनकी कंपनी का सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के साथ अनुबंध है, जिसके माध्यम से महिलाओं को समूह ऋण उपलब्ध कराया जाता है। कंपनी द्वारा कराए गए ऑडिट में पता चला कि धमधा शाखा के शाखा प्रबंधक और कर्मचारियों ने ग्राहकों से वसूली गई ऋण किस्त और लोन क्लोजर की रकम कंपनी के खाते में जमा ही नहीं की।
जांच के दौरान कंपनी ने संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर राशि जमा करने और स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया, लेकिन आरोपियों ने न तो रकम वापस की और न ही नोटिस का कोई जवाब दिया। इसके बाद कराए गए विस्तृत ऑडिट में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत 267 महिला ग्राहकों से प्राप्त कुल 1,11,93,173 रुपये का गबन कर कंपनी के साथ धोखाधड़ी की।
शिकायत की जांच के बाद थाना धमधा में अपराध क्रमांक 176/2026 दर्ज कर धारा 316(5), 318(4) एवं 61(2) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला कायम किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर आरोपियों की तलाश शुरू की और 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दोनों ने अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में अनिल विश्वकर्मा (23 वर्ष), निवासी साजा, जिला बेमेतरा तथा संदीप कुमार खूंटीहरे (31 वर्ष), निवासी पाटन, जिला दुर्ग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस के अनुसार धोखाधड़ी का मुख्य कारण ग्राहकों से प्राप्त ऋण की किस्त और लोन क्लोजर की राशि को कंपनी में जमा नहीं कर निजी उपयोग में लेना था। मामले में 1 करोड़ 11 लाख 93 हजार 173 रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।