पूर्व पार्षदों का आरोप- आडाणी को फायदा पहुंचाने छत्तीसगढ़ में खड़ा किया गया कृत्रिम बिजली संकट
दुर्ग/ विद्युत के मामले में सरप्लस राज्य छत्तीसगढ़ में साय सरकार गौतम आडाणी की कंपनी के सोलर पैनल की बिक्री बढ़ाने के लिए बिजली का कृत्रिम संकट खड़ा किया है ताकि लोग त्रस्त होकर प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा आडाणी के सोलर पैनल लगाने पर बाध्य हों। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद मदन जैन के निज निवास में कांग्रेस के पूर्व पार्षदों की साप्ताहिक बैठक में यह आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के कोआर्डिनेटर और नगर निगम दुर्ग के पूर्व नेता प्रतिपक्ष देवकुमार जंघेल, अब्दुल गनी, लिखन साहू, पूर्व पार्षद अमृत लोढ़ा, संजय सिंह, भोला महोबिया, मनोज चंद्राकर, मनीष यादव, डॉ. छत्रसाल गायकवाड, राजकुमार वर्मा, युवराज ठाकुर, आदि ने कहा है कि सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग समय की मांग है लेकिन इसके लिए षड्यंत्र पूर्वक बिजली का संकट खड़ा करना, बार-बार बिजली की दरों में वृद्धि करना और राकेट की रफ्तार से भागने वाले नये स्मार्ट मीटर लगाकर निरीह विद्युत उपभोक्ताओं को हजारों रुपये का भारी भरकम बिल थमाना घोर अन्याय है। उपर से भीषण गर्मी में बिजली की आपूर्ति बार-बार बंद कर लोगों को परेशान करना साय सरकार का अमानवीय कृत्य है। जिसके लिए प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को कभी माफ नहीं करेगी। ढाई साल बाद होने वाले चुनाव में सबक सिखाएगी। श्री जंघेल और पूर्व पार्षदों ने कहा है कि यह वही छत्तीसगढ़ है जहां पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराती थी और बिजली बिल हाफ योजना का सभी को लाभ पहुंचाती थी। किंतु जब से साय सरकार बनी है सबसे पहले हाफ बिजली बिल योजना बंद कर जनता को बिजली का जोरदार झटका दिया। फिर लगातार बिजली दर में वृद्धि कर करंट देना शुरू कर दिया। स्मार्ट मीटर लगाकर दोगुना से भी ज्यादा बिल वसूलना शुरू कर दिया। बिजली की ऐसी आंख मिचौली शुरू कर दी कि लोगों का जीना मुहाल हो गया। ये सारा प्रपंच आडाणी की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए रचा गया। मरता क्या नही करता की तर्ज पर हजारों लोगों ने कर्ज लेकर लाखों की लागत से सोलर पैनल लगवा लिए जिस पर सरकार ने कुछ हजार का अनुदान देकर वाहवाही लूटी और यह भी दावा किया कि सौर ऊर्जा उपभोक्ता यदि अपने उपयोग से ज्यादा बिजली का उत्पादन करेगा तो उसकी अतिरिक्त बिजली सरकार खरीद लेगी या वह राशि उसके बिजली बिल में समायोजित कर दी जाएगी लेकिन आज तक किसी भी सौर ऊर्जा उपयोगकर्ता की अतिरिक्त बिजली की राशि उसके बिल में समायोजित नहीं की गया है। इस बारे में लोग शिकायत करते हैं तो विद्युत विभाग के अधिकारी कहते हैं इस बारे में सरकार ने अभी तक कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। यह हैरत की बात है कि बगैर गाइडलाइन बनाए कैसे पीएम सूर्य घर योजना क्रियान्वित की जा रही है? इससे भी बड़ा सवाल यह कि सौर ऊर्जा उपयोगकर्ता की अतिरिक्त बिजली आखिर कहाँ जा रही है? इस बारे में मुख्यमंत्री को जो ऊर्जा मंत्री भी हैं जवाब देना चाहिए। अन्यथा इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस जन आंदोलन पर बाध्य होंगे।